लखनऊ। मोहर्रम के अवसर पर लखनऊ स्थित रौज़ा-ए-काज़मैन में आयोजित खम्सा-ए-मजलिस के दौरान अकीदत और गम का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर सबील-ए-सक़्का-ए-सकीना लगाकर अज़ादारों और राहगीरों को ठंडा शर्बत व पेयजल वितरित किया गया।
सबील की खिदमत में सैयद मुराद मेहदी सहित कई समाजसेवी और अंजुमन के कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर आने वाले अज़ादारों को शर्बत और पानी पिलाकर इंसानियत और खिदमत का संदेश दिया। देर रात तक सबील पर लोगों की आवाजाही बनी रही।
खम्सा-ए-मजलिस में ज़ाकिर ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदा-ए-कर्बला की अज़ीम कुर्बानियों पर रोशनी डालते हुए हक़, इंसाफ़, सब्र और इंसानियत के पैग़ाम को अपनाने की अपील की। मजलिस के बाद अज़ादारों ने नौहाख़्वानी और मातम कर शोहदा-ए-कर्बला को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।
इस दौरान बड़ी संख्या में अज़ादार मौजूद रहे। आयोजकों ने बताया कि मोहर्रम के दिनों में खिदमत और सबील का सिलसिला लगातार जारी रहेगा, ताकि हज़रत अब्बास (अ.स.) की वफ़ादारी और इंसानियत के पैग़ाम को आम किया जा सके।


